Sunday, May 2, 2021

भारतीय झंडे का विकास

 भारतीय झंडे का विकास [making of the national flag ]  हमारा झंडा सबसे पहले ७ अगस्त १९०६ को यह कांग्रेस झंडा यस. एन. बैनर्जी ने कलकत्ता में फहराया 

इस झंडे की तीन पट्टिया गहरी हरी , गहरी पीली और गहरी लाल रंग की थी। 

१ -इस झंडे पर आठ सफ़ेद कमल के फूल।,सूर्य का चिन्ह एक चाँद तारा और वनडे मातरम के शब्द अंकित थे। 

-१९०७ में यह झंडा मैडम कामा ने पैरिस में फहराया।  यह झंडा पहले लगभग झंडा जैसा ही था केवल इतना ही अंतर था की इसमें केवल एक कमल का फूल और सात तारे थे। 

३ -१९१६ में यह होमरूल झंडा मिसिज एनी बेसेंट ने फहराया। इस झंडे में पांच लाल और चार हरी पट्टियां ,सात तारे और एक कोने में छोटा यूनियन जैक झंडे का चिन्ह अंकित था। 

४- १९२१ में यह झंडा महात्मा गाँधी ने प्रस्तुत किया।  इसमें सफ़ेद , हरी और लाल रंग की तीन पट्टियां तथा चरखे का चिन्ह अंकित था। 

५-१९३१ में यह झंडे का रंग  भगवा रंग का था और इसमें चरखे का चिन्ह अंकित था 

६-अगस्त १९३१ में यह झंडा कांग्रेस ने अपनाया इसमें भगवा सफ़ेद और हरी तीन पट्टिया तथा चरखे का चिन्ह अंकित था। 

७- २२ जुलाई १९४७ में यह झंडा भारतीय विधान सभा ने अपनाया इसमें चरखे स्थान पर सम्राट अशोक का धर्म चक्र अंकित है। 

राष्ट्रीय ध्वज [national flag ]

 

राष्ट्रीय ध्वज एक क्षैतिज तीन रंगो का ध्वज है जिसमे सबसे ऊपर केसरी ,मध्यम में श्वेत रंग तथा निचे हरे रंग की समान चौड़ाई की पट्टियां जुडी हुई है। ध्वज की लम्बाई और चौड़ाई में ३:२ का अनुपात  है। मध्य की श्वेत पट्टी पर नील रंग का चक्र बना है तो यह सारनाथ के अशोक स्तम्भ के शीर्ष फलक से लिया गया है इसका व्यास [diameter ]लगभग श्वेत पट्टी की चौड़ाई के बराबर है तथा इसमें २४ तिलिया  है। 

   इसका यार रूप संविधान सभा में २४ जुलाई १९४७ को स्वीकार किया गया था और इसका प्रयोग तथा प्रदर्सन ध्वज संहिता के ऊपर ही किया जा सकता है। सर्कार ने २००२ में [flag code of india  ]कानून बनाया ,जो २६ जनवरी २००२ से लागू किया  गया। इस क़ानून में सरकार ने ध्वज रोहन के अलग नियम के निर्देश  दिए इस नए कानून  के अनुसार साधारण जनता निजी संस्थाए शैक्षिक संस्थाए आदि ध्वजारोहण कर सकती है। 

Guideline about hoisting the national flag 

१- राष्ट्रीय ध्वज  कही भी फहराया जाया उसको सम्मानित स्थान देना चाहिए। 

          २ -कटा -फटा और अस्त व्यस्त ध्वज को कभी  नहीं फहराना चाहिए 

          ३ -राष्ट्रीय ध्वज को जान भुझ कर उल्टा कभी नहीं फहराना चाहिए न तो धरती और फर्स को छूना चाहिए और न ही पानी को छूना चाहिए। 

           ४ -किसी भी व्यक्ति के सम्मान में ध्वज को निचे नहीं करना चाहिए। 

          ५- किसी भी प्रकार के कपड़ो में तथा किसी वस्तु को लाने व देने में राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग नहीं करना चाहिए। 

           ६ -अपने लाभ के उद्देस्य में राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग नहीं करना चाहिए। 

           ७-खेल एवं सांस्कृतिक आयोजनों में प्रयोग में लाये गए। कागजी ध्वज को आयोजनों के पश्चात फाड़ना तथा जमींन  पर नहीं फेकना चाहिए। [As issued by  ministry of  ho


me affairs goverments of  india ]

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