[ राजकीय चिन्ह ]
१ -यह चिन्ह सारनाथ में मिले अशोक स्तंभ के शीर्ष फलक को रूपांतर करके बनाया गया है। मौलिक फलक के शीर्ष में चार सिंह पीठ से पीठ जोड़े खड़े है। यह एक उलटे कमल पर बानी चित्र वल्लरी [frieze ]है जिस पर एक सांड एक घोडा एक हाथी एक सिंह की अत्यंत सुन्दर उभरी हुई प्रतिमाये अंकित है। इन प्रतिमाओं के मध्य में एक चक्र भी बना है। यह समस्त सिंह शीर्षस्थ एक एकांकी [single ] रेतीले पत्थर से कटे स्तम्भ के रूप में मिला है। यह भिन्न- भिन्न पशु गौतम बुध के जीवन से सम्बंधित थे और यह चक्र उस धर्म चक्र का प्रतिक है जो जो उसने सारनाथ के उपवन में प्रथम आदेश चला कर चलाया था
इस राजकीय चिन्ह में जो २६ जनवरी १९५० को सरकार ने स्वीकार किया था उसमे केवल तीन सिंह दिखाई दिते है क्योकि चौथा सिंह पीठ के पीछे छिपा है। इस चित्र में जो चक्र खुदा है उसके दाहिने ओर एक सांड तथा बायी ओर एक छलांग लगता हुआ घोडा है। इन प्रतिमाओं के दोनों ओर उसी चक्र के रेखा चित्र दिखाई देते है। निचे का उल्टा कमल होटा दिया गया है तथा उस शीर्षस्थ के निचे ,मंडूक उपनिषद से लिया गया है वाक्यांश ' सत्य मेव जयते ' अर्थात सत्य की ही विजय होता है यह देवनगरी लिपि में लिखी गयी है।
[ राष्ट्रीय गीत ]
राष्ट्रीय स्वतत्रता संघर्ष के दिनों में बक़िम चंद्र चटोपध्याय द्वारा रचित आनंद मैथ नमक उपन्यास का बन्दे मातरम नाम का यह गीत लोगो के लिए अत्यंत प्रेरणादायक गीत रहा। कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार यह १८९६ में गाय गया और उसके उपरांत यह सदैव वंहा गाय जाता है। यह इस प्रकार है।
वन्दे मातरम
सुजलाम सुफलाम मलयजशीतलाम
सस्य श्यामलाम मातरम्
शुभ्र ज्योत्सनाम पुलकित यामिनीम
फुल्ल कुसमित द्रुमदल शोभिनीम
सुहासिनींम सुमधुर भाषिनीम
सुखदाम वरदान मातरम्
वंदे मातरम्
यह गीत भी अधिक लम्बा है परन्तु इसका प्रथम खंड ही बहुत महत्वपूर्ण है और इसका महत्व राष्ट्रगान के बराबर है। और इस प्रकार है
हे माता मै आपको नस्कर करता हूँ.
हे माता आप सुन्दर नदियों
सुन्दर फूलो और मलय पर्वत की शीतल समीर तथा हरियाली से शुशोभित है।
आप की राते चन्द्रमा की की शुभ ज्योति से मन को पुलकित कर देती है
आप के वृछो के झुण्ड फूलो से पल्लवित है।
आप हास्य नाद से गुंजायमान है और आप की वाणी बहुत मीठी है।
हे माता तू हमें सुख रुपी वर दे।
[बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय]
[ राष्ट्रीय पशु ]
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ-हमार राष्ट्रीय पशु बाघ है एवं पशुओ में सबसे भव्य ,अपारशक्ति ,स्फूर्ति ,सौंदर्य तथा शोभा का प्रतीक बाघ [panther tigris अथवा linnaeus ] को राष्ट्रिय पशु स्वीकार किया गया है यद्यपि स्वेत बाघ भी होता है परन्तु प्रायः इसके पीले शरीर पर काली धारियाँ होती है और इसे हमारे वन का राजा माना जाता है संसार में इसकी आठ जातिंया है परन्तु भारतीय बाघ को शाही बंगाल बाघ [royal bangal tiger ] के नाम से पुकारते है १९वी तथा २०वी शताब्दी प्रथम अर्ध में अनगिनत बाघों का शिकार किया गया है हमारे महाराजा ,उच्च पदाधिकारी विशेषकर अंग्रेज तथा बड़े जिम्मेदार ,इस प्राणी को गोली मार कर अपनी वीरता समझते थे। इसकी संख्या प्रतिदिन कम हो रही हैअब यह सुरछित पशु है और इसका शिकार करना अथवा मरना वर्जित किया गया है और इसकी संख्या बढ़ाने के लिए बहुत से सुरक्षित वन निर्धारित किये गए है।
भारत का राष्ट्रीय बाघ


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