मीरा बाई चानू को ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों रजत पदक मिला है वही हम आप लोगो को बता दे मीरा बाई को गोल्ड मैडल मिल सकता है क्योकि चीन के खिलाडी को ड्रग्स के खुराक लेने का आरोप लगा है अगर जांच में पाया गया की वह सही है तो वह
गोल्ड पा सकती है और भारत को एक और सफलता मिल सकती और हमारे देश को भारत की बीटियो पर गर्व है। मीरा बाई चानू हमारे देश के एक छोटे परिवार की बेटी है इनका पूरा नाम साइखोम मीराबाई चानू है।
कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का लिखा हुआ एक गीत २४ जनवरी १९५० को स्वीकार किया गया। यह पहली बार २७ दिसंबर १९११ को हुए भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था यद्यपि सम्पूर्ण गान में पांच पद्य खंड stanzs है परन्तु प्रथम खंड ही राष्ट्र गान के रूप में स्वीकार किया गया है। जो इस प्रकार है -
जन गण मन अधिनायक जय हे, भारत भाग्य विधाता। पंजाब सिंधु गुजरात मराठा द्रविड़ उत्कल बंग। विंध्य हिमांचल यमुना गंगा उच्छल जलधि तरंग। तव् शुभ नामे जागे तब शुभ आशीष मांगे गाहे तव जय गाथा। जन गण मंगल दायक जय हे भारत भाग्य विधाता। जय हे जय हे जय हे जय जय जय जय हो।
इसके बजाने लगभग ५२ सेकण्ड लगते है। इसका एक छोटा रूपांतर भी है जिसमे प्रथम तथा अंतिम पंक्ति का प्रयोग किया जाता है और बजाने में लगभग २० सेकण्ड लगते है
इसका अर्थ इस प्रकार है
तुम सभी लोगो के मन के स्वामी हो तथा भारत के भाग्य विधाता हो तुम्हारे नाम से पंजाब गुजरात और सिंधु मराठा द्रैविडो ,उड़ीसा तथा बंगाल के हृदय सचेत हो जाते है यह विन्धय और हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं में गूंजता है यमुना और गंगा के संगीत में मिल जाता है और भारतीय महासागरकी लहरों द्वारा गाया जाता है ये सब तुम्हारे आशीष की कामना करते है तथा तुम्हारे गन गाते है तुम जान समूह के मंगलदायक हो और भारत के भाग्य विधाता हो जय हो जय हो जय हो जय जय जय जय हो।
भारत का राष्ट्रिय फूल -हमारे भारत का राष्ट्रीय फूल कमल का फूल है जो की पवित्र फूल है ,प्राचीन भारत की पौराणिक विद्या तथा कला में एक मात्रा स्थान है और जिसे अति प्राचीन समय से भारतीय संस्कृति का एक प्रतिक माना जाता है
कमल जिसे प्रतिक माना जाता है पवित्रम ,सुंदरता ऐश्वर्यता ,शालीनता ,उर्वरता ,सुख -समृद्धि ,ज्ञान एवं शान्ति का जिसे विजय एवं सफलता का प्रतिक माना जाता है चूँकि कमल कीचड़ में खिलता है और हजारो वर्षो तक पुनः अंकुरित होते हुए जीवित रह सकता है। इस लिए यह लम्बी आयु ,सम्मान एवं उज्ज्वल भविष्य को प्रदर्शित करता है
सामान्यतः ये स्वेत एवं गुलाबी रंग मेये जाते है और वे अन्धकारयुक्त एवं छिंछले पानी में में उगते है। कुछ फ़ूलनीले रंग में भी दिखाई देते है।
लक्ष्मी एवं सरस्वती देवियाँ कमल के फूल पर विराजमान है। भगवान् शिव ने भी जो शेषनाग के प्रकोप से बचना चाहता था ,स्वयं को मधुमखी के आकार में ढल कर कमल में शरण ली थी। बौद्ध इस फूल को पवित्रता की भांति मानते है। पौधा जो अपने में अनेकता को एकता में संजोये हुए है यद्यपि पौधे की पत्तिया पानी की पृष्ठ पर फ़ैल रही है भी पानी की एक बून्द पत्तियों के शीर्ष पर समायोजित नहीं है। शायद मानो वे मानव को जीवन से बद्ध बिछुड़ने एवं सांसारिक आनन्दो से मुक्ति का पाठ पढ़ाती है।
अछूत अपवित्रता द्वारा ,कमल दिल व् दिमाग की पवित्रता को दर्शाता है और मानव को भारतीय ग्रन्थ द्वारा एक अलगाव जीवन जीने का उद्देश्य देता है
कुछ महत्वपूर्ण तथ्य -
कमल (निलम्बो नूसीपेरा गेर्टन) भारत का राष्ट्रीय फूल है। यह पवित्र पुष्प है और इसका प्राचीन भारत की कला और गाथाओं में विशेष स्थान है और यह अति प्राचीन काल से भारतीय संस्कृति का मांगलिक प्रतीक रहा है। भारत पेड़ पौधों से भरा है।]अब तक 70 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया गया उसमें से भारत के वनस्पति सर्वेक्षण द्वारा 47,000 वनस्पति की प्रजातियों का वर्णन किया गया है।
भारत का राष्ट्रिय पक्षी -भारत में पक्षियों में सबसे सुन्दर पक्षी भारतीय मोर [pavo cristau अथवा linnaeus ]है। इसे भी १९७२ के के भारतीय पक्षी विधेयक के अनुसार मारना वर्जित है। यह भारतीय साहित्य में विशेष स्थान रखता है। इसका रंग नीला ,सिर पर छोटे-छोटे पंखो का मुकुट ,आँखों के निचे एक स्वेत धब्बा ग्रीवा पतली और लम्बी है। नर अधिक सुन्दर एवं रंगीला होता है। पूंछ में लगभग दो सौ पंख होते है जो वह समय समय पर गिराता रहता है। मादा के सिर पर मुकुट एवं शरीर पर पूंछ नहीं होती है यह तनिक भूरे रंग की होती है
भारतीय उपमहाद्वीप में यह पक्षी उत्तर में सिंधु नदी से लेकर असं ,मिजोरम तक तथा समस्त दक्षिण प्रायःद्वीप में मिलता है। आज तो यह सुरक्षित है ही ,परन्तु लोग भी इसे प्रायः धर्म तथा संवेदना के कारण हानि नहीं पहुंचते है
कुछ विशेष तत्व- भारत का राष्ट्रीय पक्षीमोर हैं । तमिलनाडु के ऊटी में भारत के राष्ट्रीय पक्षी घोषित करने सम्बंधी आयोजित बैठक में मोर के साथ साथ सारस क्रैन, ब्राह्मिणी काइट, बस्टार्ड, और हंस के नामों पर भी चर्चा की गयी एवं अंतत: मोर को 26 जनवरी 1963 को भारत का राष्ट्रीय पक्षी घोषित किया गया ।मोर के साथ साथ सूची के अन्य पक्षी भी बेहतर विकल्प थे किंतु नाम चुनने हेतु बनाई गयी गाइडलाइन्स के अनुसार राष्ट्रीय पक्षी घोषित किए जाने के लिए उस पक्षी का देश के सभी हिस्सों में मौजूद होना जरूरी है। यह म्यांमार का भी राष्ट्रीय पक्षी है
१ -यह चिन्ह सारनाथ में मिले अशोक स्तंभ के शीर्ष फलक को रूपांतर करके बनाया गया है। मौलिक फलक के शीर्ष में चार सिंह पीठ से पीठ जोड़े खड़े है। यह एक उलटे कमल पर बानी चित्र वल्लरी [frieze ]है जिस पर एक सांड एक घोडा एक हाथी एक सिंह की अत्यंत सुन्दर उभरी हुई प्रतिमाये अंकित है। इन प्रतिमाओं के मध्य में एक चक्र भी बना है। यह समस्त सिंह शीर्षस्थ एक एकांकी [single ] रेतीले पत्थर से कटे स्तम्भ के रूप में मिला है। यह भिन्न- भिन्न पशु गौतम बुध के जीवन से सम्बंधित थे और यह चक्र उस धर्म चक्र का प्रतिक है जो जो उसने सारनाथ के उपवन में प्रथम आदेश चला कर चलाया था
इस राजकीय चिन्ह में जो २६ जनवरी १९५० को सरकार ने स्वीकार किया था उसमे केवल तीन सिंह दिखाई दिते है क्योकि चौथा सिंह पीठ के पीछे छिपा है। इस चित्र में जो चक्र खुदा है उसके दाहिने ओर एक सांड तथा बायी ओर एक छलांग लगता हुआ घोडा है। इन प्रतिमाओं के दोनों ओर उसी चक्र के रेखा चित्र दिखाई देते है। निचे का उल्टा कमल होटा दिया गया है तथा उस शीर्षस्थ के निचे ,मंडूक उपनिषद से लिया गया है वाक्यांश ' सत्य मेव जयते ' अर्थात सत्य की ही विजय होता है यह देवनगरी लिपि में लिखी गयी है।
[ राष्ट्रीय गीत ]
राष्ट्रीय स्वतत्रता संघर्ष के दिनों में बक़िम चंद्र चटोपध्याय द्वारा रचित आनंद मैथ नमक उपन्यास का बन्दे मातरम नाम का यह गीत लोगो के लिए अत्यंत प्रेरणादायक गीत रहा। कांग्रेस के अधिवेशन में पहली बार यह १८९६ में गाय गया और उसके उपरांत यह सदैव वंहा गाय जाता है। यह इस प्रकार है।
वन्दे मातरम
सुजलाम सुफलाम मलयजशीतलाम
सस्य श्यामलाम मातरम्
शुभ्र ज्योत्सनाम पुलकित यामिनीम
फुल्ल कुसमित द्रुमदल शोभिनीम
सुहासिनींम सुमधुर भाषिनीम
सुखदाम वरदान मातरम्
वंदे मातरम्
यह गीत भी अधिक लम्बा है परन्तु इसका प्रथम खंड ही बहुत महत्वपूर्ण है और इसका महत्व राष्ट्रगान के बराबर है। और इस प्रकार है
हे माता मै आपको नस्कर करता हूँ.
हे माता आप सुन्दर नदियों
सुन्दर फूलो और मलय पर्वत की शीतल समीर तथा हरियाली से शुशोभित है।
आप की राते चन्द्रमा की की शुभ ज्योति से मन को पुलकित कर देती है
आप के वृछो के झुण्ड फूलो से पल्लवित है।
आप हास्य नाद से गुंजायमान है और आप की वाणी बहुत मीठी है।
हे माता तू हमें सुख रुपी वर दे।
[बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय]
हमारे देश सुप्रशिद्ध एवं विख्यात कवि बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय (बंगाली: বঙ্কিমচন্দ্র চট্টোপাধ্যায়) (२७ जून १८३८ - ८ अप्रैल १८९४) बंगाली के प्रख्यात उपन्यासकार, कवि, गद्यकार और पत्रकार थे। भारत के राष्ट्रीय गीत 'वन्दे मातरम्' उनकी ही रचना है जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के काल में क्रान्तिकारियों का प्रेरणास्रोत बन गया था।
[ राष्ट्रीय पशु ]
भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ-हमार राष्ट्रीय पशु बाघ है एवं पशुओ में सबसे भव्य ,अपारशक्ति ,स्फूर्ति ,सौंदर्य तथा शोभा का प्रतीक बाघ [panther tigris अथवा linnaeus ] को राष्ट्रिय पशु स्वीकार किया गया है यद्यपि स्वेत बाघ भी होता है परन्तु प्रायः इसके पीले शरीर पर काली धारियाँ होती है और इसे हमारे वन का राजा माना जाता है संसार में इसकी आठ जातिंया है परन्तु भारतीय बाघ को शाही बंगाल बाघ [royal bangal tiger ] के नाम से पुकारते है १९वी तथा २०वी शताब्दी प्रथम अर्ध में अनगिनत बाघों का शिकार किया गया है हमारे महाराजा ,उच्च पदाधिकारी विशेषकर अंग्रेज तथा बड़े जिम्मेदार ,इस प्राणी को गोली मार कर अपनी वीरता समझते थे। इसकी संख्या प्रतिदिन कम हो रही हैअब यह सुरछित पशु है और इसका शिकार करना अथवा मरना वर्जित किया गया है और इसकी संख्या बढ़ाने के लिए बहुत से सुरक्षित वन निर्धारित किये गए है।
भारतीय झंडे का विकास [making of the national flag ] हमारा झंडा सबसे पहले ७ अगस्त १९०६ को यह कांग्रेस झंडा यस. एन. बैनर्जी ने कलकत्ता में फहराया
इस झंडे की तीन पट्टिया गहरी हरी , गहरी पीली और गहरी लाल रंग की थी।
१ -इस झंडे पर आठ सफ़ेद कमल के फूल।,सूर्य का चिन्ह एक चाँद तारा और वनडे मातरम के शब्द अंकित थे।
२ -१९०७ में यह झंडा मैडम कामा ने पैरिस में फहराया। यह झंडा पहले लगभग झंडा जैसा ही था केवल इतना ही अंतर था की इसमें केवल एक कमल का फूल और सात तारे थे।
३ -१९१६ में यह होमरूल झंडा मिसिज एनी बेसेंट ने फहराया। इस झंडे में पांच लाल और चार हरी पट्टियां ,सात तारे और एक कोने में छोटा यूनियन जैक झंडे का चिन्ह अंकित था।
४- १९२१ में यह झंडा महात्मा गाँधी ने प्रस्तुत किया। इसमें सफ़ेद , हरी और लाल रंग की तीन पट्टियां तथा चरखे का चिन्ह अंकित था।
५-१९३१ में यह झंडे का रंग भगवा रंग का था और इसमें चरखे का चिन्ह अंकित था
६-अगस्त १९३१ में यह झंडा कांग्रेस ने अपनाया इसमें भगवा सफ़ेद और हरी तीन पट्टिया तथा चरखे का चिन्ह अंकित था।
७- २२ जुलाई १९४७ में यह झंडा भारतीय विधान सभा ने अपनाया इसमें चरखे स्थान पर सम्राट अशोक का धर्म चक्र अंकित है।
राष्ट्रीय ध्वज [national flag ]
राष्ट्रीय ध्वज एक क्षैतिज तीन रंगो का ध्वज है जिसमे सबसे ऊपर केसरी ,मध्यम में श्वेत रंग तथा निचे हरे रंग की समान चौड़ाई की पट्टियां जुडी हुई है। ध्वज की लम्बाई और चौड़ाई में ३:२ का अनुपात है। मध्य की श्वेत पट्टी पर नील रंग का चक्र बना है तो यह सारनाथ के अशोक स्तम्भ के शीर्ष फलक से लिया गया है इसका व्यास [diameter ]लगभग श्वेत पट्टी की चौड़ाई के बराबर है तथा इसमें २४ तिलिया है।
इसका यार रूप संविधान सभा में २४ जुलाई १९४७ को स्वीकार किया गया था और इसका प्रयोग तथा प्रदर्सन ध्वज संहिता के ऊपर ही किया जा सकता है। सर्कार ने २००२ में [flag code of india ]कानून बनाया ,जो २६ जनवरी २००२ से लागू किया गया। इस क़ानून में सरकार ने ध्वज रोहन के अलग नियम के निर्देश दिए इस नए कानून के अनुसार साधारण जनता निजी संस्थाए शैक्षिक संस्थाए आदि ध्वजारोहण कर सकती है।
Guideline about hoisting the national flag
१- राष्ट्रीय ध्वज कही भी फहराया जाया उसको सम्मानित स्थान देना चाहिए।
२ -कटा -फटा और अस्त व्यस्त ध्वज को कभी नहीं फहराना चाहिए
३ -राष्ट्रीय ध्वज को जान भुझ कर उल्टा कभी नहीं फहराना चाहिए न तो धरती और फर्स को छूना चाहिए और न ही पानी को छूना चाहिए।
४ -किसी भी व्यक्ति के सम्मान में ध्वज को निचे नहीं करना चाहिए।
५- किसी भी प्रकार के कपड़ो में तथा किसी वस्तु को लाने व देने में राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
६ -अपने लाभ के उद्देस्य में राष्ट्रीय ध्वज का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
७-खेल एवं सांस्कृतिक आयोजनों में प्रयोग में लाये गए। कागजी ध्वज को आयोजनों के पश्चात फाड़ना तथा जमींन पर नहीं फेकना चाहिए। [As issued by ministry of ho