Saturday, May 8, 2021

हमारा राष्ट्रगान

 हमारा राष्ट्रगान -  

कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर का लिखा हुआ एक गीत २४ जनवरी १९५० को स्वीकार किया गया। यह पहली बार २७ दिसंबर १९११ को हुए भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस के अधिवेशन में गाया गया था यद्यपि सम्पूर्ण गान में पांच पद्य खंड stanzs है परन्तु प्रथम खंड ही राष्ट्र गान के रूप में स्वीकार किया गया है। जो इस प्रकार है - 

 


जन गण मन अधिनायक जय हे, 
भारत भाग्य विधाता।
पंजाब सिंधु गुजरात मराठा 
द्रविड़ उत्कल बंग। 
विंध्य हिमांचल यमुना गंगा  
उच्छल जलधि तरंग। 
तव् शुभ नामे जागे 
तब शुभ आशीष मांगे गाहे तव जय गाथा। 
जन गण मंगल दायक जय हे 
भारत भाग्य विधाता। 
जय हे जय हे जय हे 
जय जय जय जय हो। 


इसके बजाने  लगभग ५२ सेकण्ड लगते है। इसका एक छोटा रूपांतर भी है जिसमे प्रथम तथा अंतिम पंक्ति का प्रयोग किया जाता है और बजाने में लगभग २० सेकण्ड लगते है 
   इसका अर्थ इस  प्रकार है 

तुम सभी लोगो के मन के स्वामी हो 
तथा भारत के भाग्य विधाता हो 
तुम्हारे नाम से पंजाब गुजरात और सिंधु मराठा 
द्रैविडो ,उड़ीसा तथा बंगाल के हृदय सचेत हो जाते है 
यह विन्धय और हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं में गूंजता है 
यमुना और गंगा के संगीत में मिल जाता है 
और भारतीय महासागरकी लहरों द्वारा गाया जाता है  
ये सब तुम्हारे आशीष की कामना करते है 
तथा तुम्हारे गन गाते है 
तुम जान समूह के मंगलदायक हो और भारत के भाग्य विधाता हो 
जय हो जय हो जय हो जय जय जय जय हो। 


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